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Tuesday, 14 July 2020

रात्रि आसमान मे अंधेरा क्यों छाया रहता है ? ओल्बर्स का पैराडाक्स

ब्रह्मांड मे अरबो आकाशगंगाये है, हर आकाशगंगा मे अरबो तारे है। यदि हम आकाश की ओर नजर उठाये तो इन तारों की संख्या के आधार पर आकाश के हर बिंदु पर कम से कम एक तारा होना चाहिये? तो रात्रि आसमान मे अंधेरा क्यों छाया रहता है ? अंतरिक्ष मे भी अंधेरा क्यों रहता है…

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Tuesday, 19 May 2020

प्रकाशनार्थ लेख : कोरोना के खिलाफ वैज्ञानिकों की जंग

यह हमारा सौभाग्य है कि अब तक ज्ञात ब्रह्मांड में केवल हमारी धरती पर ही जीवन है। सिर्फ जीवन ही नहीं है, बल्कि मानव जाति ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में इतनी प्रगति की है कि आज हम एक सुविधाजनक और सुरक्षित जीवन जीने में भी सक्षम हैं। मगर हमारी वर्तमान दुनिया राजनैतिक, सामाजिक और पर्यावरण…

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Sunday, 26 April 2020

विज्ञान से बढ़कर नहीं है कोई भी वैज्ञानिक

हाल ही में फ्रांस के वायरोलॉजिस्ट और साल 2008 में एचआईवी-विषाणु की खोज के लिए चिकित्सा विज्ञान के नोबेल पुरस्कार विजेता ल्यूक मॉन्टेनियर ने दावा किया है कि सार्स-सीओवी 2 वायरस मानव निर्मित है। उन्होंने बताया कि ये वायरस चीन के लैब में एचआईवी  वायरस के खिलाफ एक वैक्सीन के निर्माण के प्रयास के परिणामस्वरूप…

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Tuesday, 31 March 2020

कोरना वायरस आपदा (Covid 19)

17 नवंबर 2019, पूरी दुनियाँ अपने रोज़मर्रा के कार्यो में व्यस्त थी लेकिन चीन के हुबेई प्रांत में एक 55 वर्षीय व्यक्ति एक वायरस के संक्रमण से पीड़ित था। उस समय तक किसी को आभास भी नही था कि यह वायरस पूरे विश्व के लिए कितना घातक सिद्ध होने वाला है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट…

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Thursday, 27 February 2020

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस – 2020 :विज्ञान में महिलाएं

वैज्ञानिक अनुप्रयोग के महत्व के संदेश को व्यापक तौर पर प्रसारित करने के लिए हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस आयोजन के द्वारा मानव कल्याण के लिए विज्ञान के क्षेत्र में घटित होने वाली प्रमुख गतिविधियों, प्रयासों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाता है।विज्ञान से होने वाले लाभों के…

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Tuesday, 8 October 2019

भौतिकी नोबेल पुरस्कार 2019: जेम्स पीबल्स, मिशेल मेयर और डिडिएर क्वेलोज

इस बार का भौतिकी का नोबेल प्राइज तीन वैज्ञानिकों जेम्स पीबल्स, मिशेल मेयर और डिडिएर क्वेलोज को प्रदान किया गया। वर्ष 2019 के लिए भौतिकी नोबेल पुरस्कार कनाडाई-अमेरिकी खगोलशास्त्री जेम्स पीबल्स(James Peebles) और स्विस खगोलविद मिशेल मेयर(Michel Mayor) और डिडिएर क्वेलोज़(Didier Queloz) को संयुक्त रूप से देने की घोषणा की गयी है। नोबेल पुरस्कार के…

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Monday, 7 October 2019

2019 चिकित्सा नोबेल पुरस्कार

इन तीन वैज्ञानिकों को चिकित्सा का नोबेल, कोशिकाओं पर शोध के लिए सम्मान 2019 के लिए नोबल पुरस्कारों का ऐलान शुरू हो चुका है। मेडिसिन के लिए संयुक्त रूप से विलियम जी कायलिन जूनियर, सर पीटर जे रैटक्लिफ और ग्रेग एल सेमेंजा के नाम की घोषणा की गई है। डॉक्टरों की इस टीम नें किस…

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Monday, 9 September 2019

चंद्रयान-2 : विक्रम लैंडर की असफ़लता

भारत शनिवार 7 सितंबर 2019 की सुबह इतिहास रचने से दो क़दम दूर रह गया। अगर सब कुछ ठीक रहता तो भारत विश्व का पहला देश बन जाता जिसका अंतरिक्षयान चन्द्रमा की सतह के दक्षिण ध्रुव के क़रीब उतरता। 978 करोड़ रुपये की लागत वाला चंद्रयान-2 मानवरहित अभियान है। इसमें उपग्रह की कीमत 603 करोड़…

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Monday, 2 September 2019

विज्ञान का मिथकीकरण

जालंधर के लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में भारतीय विज्ञान कांग्रेस का 106वां अधिवेशन 7 जनवरी, 2019 को संपन्न हुआ। इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन की स्थापना दो अंग्रेज़ वैज्ञानिकों जे. एल. सीमोंसन और पी. एस. मैकमोहन की दूरदर्शिता और पहल पर 1914 में हुई थी। 1914 में ही इसका पहला अधिवेशन कोलकाता के एशियाटिक सोसाएटी मे हुआ…

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Monday, 12 August 2019

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई

विक्रम साराभाई (जन्म- 12 अगस्त, 1919, अहमदाबाद; मृत्यु- 30 दिसम्बर, 1971, तिरुवनंतपुरम) को भारत के ‘अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक’ माना जाता है। इनका पूरा नाम ‘डॉ. विक्रम अंबालाल साराभाई’ था। इन्होंने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊँचाईयों पर पहुँचाया और अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर देश की उपस्थिति दर्ज करा दी। विक्रम साराभाई ने…

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Thursday, 1 August 2019

अंधविश्वास के अंधेरों तक कैसे पहुंचे रोशनी

पिछले दिनों झारखंड में लातेहार जिले के सेमरहाट गांव में दो बच्चों की नरबलि देने का मामला सामने आया। इससे पहले असम के उदालगुड़ी जिले के कलाईगांव में एक विज्ञान शिक्षक द्वारा पड़ोस के बच्चे की बलि देने की कोशिश की चौंकाने वाली खबर आई थी। चिंता की बात यह है कि नरबलि की बात…

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Friday, 19 July 2019

चंद्रमा पर मानव के 50 वर्ष विशेष : मानव का यह एक नन्हा कदम, मानवता की एक लम्बी छलांग है।

20 जुलाई 1969 को चंद्रमा पर पहली बार मानव के कदम पड़े। नासा के अभियान अपोलो-11 से नील आर्मस्ट्रॉन्ग, माइकल कॉलिन्स और एडविन एल्ड्रिन पहली बार चंद्रमा पर पहुंचे। मानव को चंद्रमा पर पहुंचाने की पहली कोशिश के तहत 16 जुलाई 1969 को अमेरिका के केप कैनेडी स्टेशन से अपोलो 11 यान तीन अंतरिक्ष यात्रियों…

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Thursday, 18 July 2019

चंद्रमा पर मानव के 50 वर्ष विशेष : चंद्रयात्रियों ने चंद्रमा के वातावरण का अभ्यास कैसे किया ?

चंद्रमा पर अवतरण से पहले चंद्रयात्रीयों ने  पृथ्वी  पर ही एक स्थान पर चंद्रमा के वातावरण का अभ्यास किया था। वह जगह है आइसलैंड। 20 जुलाई 1969 को अमरीकी अंतरिक्षयात्री नील आर्मस्ट्रांग अपोलो-11 के चंद्रयान ईगल से बाहर निकले और चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले मानव बन गए। उन्होंने घोषणा की, “उनका वह छोटा-सा…

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